1/07/2020

साक्षात्कार

साक्षात्कार
-आप हिंदी से एमए नहीं हैं, इसलिए मीडिया के छात्रों को नहीं पढा सकते।
-मैं पत्रकारिता और जनसंचार से मास्टर किया है। दस वर्ष हिंदी पत्रकारिता की है। वह भी राष्ट्रीय अखबारों में। और विभिन्न संस्थानों में पत्रकारिता पढा भी रहा हूं।
-यह हिंदी विभाग है, इसलिए हिंदी में मास्टर तो होने चाहिए।
-लेकिन विज्ञापन में तो ऐसी अनिवार्य योग्यता तो लिखी नहीं थी।
-तो आप ऐसा करिये एचआरएस (हिंदी रिलीजन स्टडी) पढा दीजिये। उसी के लिए हम आपको रख सकते हैं।
-मैं हिंदू धर्म को जानता ही कितना हूं? उतना ही जानता हूं जितना पारंपरिक तौर पर मेरे घर में पूजा-पाठ होता है।
-फिर आपको हम नहीं रख सकते?
- क्यों?
-आप इन्हें समझा दीजिये कि इनका चयन क्यों नहीं हो सकता
(बगल में बैठे शख्स की ओर देखते हुए)।
#अभ्यर्थी की डायरी

1/06/2020

छात्र, राजनीति और तोहफे

सेकेंगे रोटियां राजनीति की
चाहे वह सत्ता में हो या सड़क पर
लगाएंगे आरोप
और लगेगा प्रत्यारोप
हर व्यक्ति कठघरे में होगा
जो होगा सड़क पर
मगर इस अच्छे और बुरे दिन की सुबह में
सत्ता की मलाई खाने को आतुर
तमाम राजनेता, अभिनेता और पत्रकार
भौंकते रहेंगे टीवी और सोशल मीडिया जैसे भोंपू पर
क्या बोलेंगे, क्या लिखेंगे
और क्या मीडिया में दिखाएंगे
टीआरपी और पब्लिसिटी के लिए
क्या हथकंडे अपनांएंगे
कोई नहीं जानता
मगर यह सत्य है कि
छात्रों की बेचैनी
छात्रों का प्रदर्शन
छात्रों का दमन
छात्रों का ज्ञान
छात्रों का अज्ञान
छात्रों की मौत
हर किसी के लिए तोहफे लाएंगे
क्योंकि
कोई सड़क छाप लोफर बन जाएगा मसीहा
बन जाएगा विधायक या सांसद
किसी को मिल जाएगी
टूटी सरकारी बिल्डिंग या सड़क बनाने का ठेका
कोई नेता शीर्षस्थ होगा सत्ता पर
मंत्री पद से होगा सुशोभित
किसी पत्रकार को मिलेगा पुरस्कार
या किसी गवर्निंग बॉडी का बन जाएगा मेंबर
या फिर किसी मंत्री-मुख्यमंत्री का बनेगा मीडिया एडवाइजर
समय वही रहेगा,लोग वही रहेंगे
मुद्दे नये उभरेंगे, पुराने मुद्दे बिसुरे जाएंगे
बदल जाएगा निजाम का जिस्म
बदल जाएंगे सड़क के मुसाफिर
कर्म का योद्धा जीतेगा दुनिया
जो फिसलेंगे, उठने में लगेंगी सदियां
बावजूद इसके,
छात्र वहीं रहेंगे
कॉलेजों में, पुस्तकालयों में
पढाई के बाद करते रहेंगे विचार-विमर्श
उठाते रहेंगे विद्रोह की आवाज
करते रहेंगे प्रदर्शन
खाते रहेंगे डंडे
गोलियां और आंसू गैस के गोले
दुनिया की तमाम सड़कों पर
ऐसे में चूंकि मेरे सपने हैं बड़े
इसलिए मैं सोता रहूंगा
इस भयंकर ठंढ में
रजाई तान कर तब तक
जब तक कि कोई बम का गोला
रोशनदान से गिरकर
फट न जाए मेरे बिस्तर पर
और मेरे जिस्म के हो न जाएं चिथड़े।
-विनीत उत्पल
18.12.2019